शाहजहांपुर महानगर में नगर आयुक्त ने बड़े जोश-खरोश से पॉलिथीन की प्रतीकात्मक शवयात्रा निकाली थी। बाकायदा कंधा दिया, नारे लगे: “पॉलिथीन का प्रयोग बंद करो!” लेकिन लगता है पॉलिथीन का भूत शहर के डीएनए में घुस गया है, क्योंकि हर गली, हर दुकान और हर ठेले पर वही पुराना पॉलिथीन का भूत मुस्कुरा रहा है। व्यवहारिक शवयात्रा और अमर आत्मा नगर निगम ने सोचा, शवयात्रा निकालकर पॉलिथीन को विदा कर दिया जाएगा; लोगों ने समझा, “अब तो पॉलिथीन की आत्मा मुक्ति पा गई।” पर पॉलिथीन जिद्दी भूत निकला—एक दुकान से निकलता तो दूसरी पर नजर आ जाता! कंधे पर चली शवयात्रा के बाद भी, शहर के दुकानदारों ने पॉलिथीन के ‘पुनर्जन्म’ का जश्न मना डाला—”एक गई, दस आई!”दुकानदारों और ग्राहकों की मजबूरी अब दुकानदार कहते हैं, “साहब, ग्राहक खुद कहता है: बिना पॉलिथीन के ठेला कैसे चलेगा?” ग्राहक बोले, “थैला भूल गए…पॉलिथीन ही सच्चा साथी है!” सबने मिलकर पॉलिथीन के भूत को इतना प्यार दिया कि नगर आयुक्त की शवयात्रा भी फीकी पड़ गई। प्रशासन की हताशा और पॉलिथीन का विजयी नृत्य अधिकारियों ने कोशिश कर ली, भाषण दे दिए, चेतावनी लगा दी, लेकिन पॉलिथीन का भूत हर बार प्रशासन के संकल्पों के बीच से निकलकर, दुकानों की दराजों में और छुपकर घर-घर पहुंच जाता है। लगता है, अब प्रशासन को पॉलिथीन भूत भगाने के लिए तंत्र-मंत्र, पूजा-पाठ या हॉरर सीरीज चलानी पड़ेगी—क्योंकि शाहजहांपुर की जनता ने तो पॉलिथीन के भूत को शहर का ‘आधिकारिक मेहमान’ बना ही दिया है। शवयात्रा, भाषण, जुर्माने, सब निष्फल हो गए—पॉलिथीन का भूत इस शहर में अमर है। नगर निगम को अगली बार पॉलीथिन के साथ सेल्फी लेना चाहिए, जिससे लोगों को पता चल जाए कि ये भूत कहीं नहीं जाने वाला, अब तो यहीं रहेगा और कचरे में भी राज करेगा!