चौक कोतवाल बने गुंडा……12 वर्षीय पीड़िता से चौक कोतवाल की अभद्रता…वीडियो वायरल
सिपाही को फोन पर दी गालियां…..गोली मारने की दी धमकी
शहर चौक कोतवाली इंस्पेक्टर ने महिला सशक्तिकरण की उड़ाई जमकर धज्जिया
समर सहारा शाहजहांपुर सरकार की नाक में चना कोई और नहीं बल्कि खुद उसकी पुलिस भूनती दिखाई दे रही है। कुछ थाना कोतवाली में ऐसे ऐसे नायाब अफसरों की फौज धरातल पर तैनात हो जो ब्रिटिश हुकूमत की याद तरोताजा अवश्य परिलक्षित होते देखी जा सकती है। जिले की कानून व्यवस्था तो बस भगवान भरोसे ही चल रही है। अब देखिए न चौक कोतवाली में तैनात कोतवाल अश्वनी सिंह का एक ऑडियो वायरल है। ऑडियो में कोतवाल अपने ही सिपाही से कैसी क्रूरतम भाषा का प्रयोग कर उसे गोली मारने को धमका रहे है। दूसरी अहम बात यह कि एक धार्मिक स्थल से एक मुस्लिम युवक द्वारा नाबालिक किशोरी के साथ अश्लीलता करते हुए आमजनों द्वारा पकड़ा गया था। आमजनों द्वारा आरोपी को चौक कोतवाली पुलिस के हवाले कर दिया गया था। कोतवाल श्री सिंह नाबालिक किशोरी को अपने कार्यालय में धमकाते हुए वीडियो तक वायरल हो रहा है। कोतवाल साहब के द्वारा इस दौरान किसी महिला पुलिस कर्मी तक को बुलाना उचित नहीं समझा था। वहीं दूसरी ओर योगी सरकार महिला सशक्तिकरण पर ज्यादा जोर दे रही है वहीं उनके कोतवाल महिलाओं को अपनी जूती समझ कर वार्ता कर रहे है। उत्तर प्रदेश सरकार महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा को लेकर भले ही निरंतर अभियान चला रही हो, लेकिन चौक कोतवाली में सामने आया मामला इन दावों की सच्चाई उजागर करता है। न्याय की आस लेकर थाने पहुंची 12 वर्षीय पीड़िता किशोरी से चौक कोतवाल का तू-तू करके बात करना न केवल अमानवीय है, बल्कि पुलिस की संवेदनशीलता पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि महिलाओं से संवाद और उनकी समस्याओं को सुनने के लिए थानों में अलग से महिला हेल्प डेस्क की व्यवस्था होने के बावजूद, इंस्पेक्टर ने किशोरी से बातचीत के दौरान किसी महिला पुलिसकर्मी को बुलाना तक जरूरी नहीं समझा। नाबालिग पीड़िता से अकेले, असंवेदनशील और अपमानजनक भाषा में पूछताछ करना नियमों और मानवीय मूल्यों—दोनों के खिलाफ है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, इंस्पेक्टर का रवैया इतना बेरूखा था कि पीड़िता सहम गई और उसके साथ आए परिजन भी स्तब्ध रह गए। जिस थाने से न्याय और सुरक्षा की उम्मीद थी, वहीं पीड़िता को अपमान और भय का सामना करना पड़ा। महिला शक्ति अभियान, बाल संरक्षण कानून और नारी सम्मान के सरकारी दावों पर यह घटना करारा तमाचा है। सवाल यह है कि जब थाने में ही पीड़िता सुरक्षित और सम्मानित महसूस नहीं करेगी, तो फिर न्याय की राह कैसे आसान होगी? अब निगाहें पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों पर टिकी हैं कि क्या इस गंभीर मामले में दोषी इंस्पेक्टर पर कार्रवाई होगी या फिर महिला सम्मान और संवेदनशील पुलिसिंग केवल पोस्टरों और नारों तक सीमित रह जाएगी।
वीडियो की जांच कराकर अगर किशोरी के साथ अभद्रता की बात सामने आई तो सम्बन्धित अधिकारी के खिलाफ कार्यवाही की जाएगी।
राजेश द्विवेदी पुलिस अधीक्षक शाहजहांपुर







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