यूपी के शाहजहांपुर – इतने कारतूस?आखिर चल क्या रहा था शहर में!एक-दो कारतूस पकड़े जाएं तो बात समझ आती है, लेकिन जब किसी एक आदमी के पास से पूरे 199 जिंदा कारतूस बरामद हों, तो माथा ठनकना लाजिमी है। सवाल ये नहीं है कि जावेद पकड़ा गया; सवाल यह है कि इतने कारतूस?आखिर 315 बोर की इन 199 गोलियों का यह जखीरा जा कहाँ रहा था? क्या शहर में किसी ‘बड़े गेम’ की तैयारी चल रही थी, या फिर शाहजहाँपुर किसी बड़े गैंग का ट्रांजिट पॉइंट बन गया है?थाना सदर बाजार इलाके से शुक्रवार की रात जो खबर आई, उसने वाकई कान खड़े कर दिए हैं। रात का सन्नाटा, सुभाषनगर तिराहे का इलाका और मुखबिर की वो एक सटीक भनक… जिसने एसओजी और सदर बाजार पुलिस को चौकन्ना कर दिया।
रात के करीब साढ़े ग्यारह बज रहे थे। दरोगा नागेन्द्र तिवारी अपनी टीम के साथ चेकिंग में मुस्तैद थे, तभी मुखबिर खास ने कान में फुसफुसाते हुए एक ऐसी खबर दी जिसने पुलिस की नींद उड़ा दी— “छोटे कुतबे के पीछे एक आदमी कारतूस बेचने की फिराक में खड़ा है, और खेप छोटी-मोटी नहीं है।”मामले की नजाकत को समझते हुए, रास्ते में एसओजी प्रभारी निरीक्षक धर्मेन्द्र कुमार की टीम के साथ तालमेल बिठाया गया और संयुक्त रूप से छोटे कुतबे के पास एकबारगी दबिश दी गई। घेराबंदी इतनी तगड़ी थी कि संदिग्ध को कुतबे से 150 कदम की दूरी पर ही दबोच लिया गया। गिरफ्त में आए शख्स ने अपना नाम जावेद अहमद उर्फ राजा (52 वर्ष), निवासी बाडूजई प्रथम, पक्का तालाब बताया।
लेकिन असली कहानी तब शुरू हुई जब पुलिस ने जावेद की जामा तलाशी ली। पुलिसकर्मियों के हाथ एक-एक कर जो कारतूस लगने शुरू हुए, तो गिनती पूरे 199 पर जाकर थमी। सारे के सारे .315 बोर के एकदम ‘फ्रेश’ और जिंदा कारतूस! इसके साथ ही उसके पास से दो की पैड वाले मोबाइल फोन और 1100 रुपये भी बरामद हुए। अपराध की दुनिया में सब जानते हैं कि स्मार्टफोन के दौर में ‘कीपैड मोबाइल’ का इस्तेमाल अक्सर ऐसे ही काले धंधों में ‘सेफ कम्युनिकेशन’ के लिए किया जाता है।
पुलिस ने जावेद को आर्म्स एक्ट की धारा 3/5/25 के तहत गिरफ्तार कर माननीय न्यायालय के समक्ष पेश तो कर दिया है, लेकिन कहानी यहाँ खत्म नहीं होती। ये 199 कारतूस सिर्फ एक मोहरा भर हैं। असली सप्लायर कौन है जो इतनी बड़ी खेप यहाँ तक पहुँचा रहा है? और सबसे अहम सवाल— इन 199 कारतूसों का खरीदार कौन था? क्या किसी गैंगवार की तैयारी थी?एसओजी प्रभारी धर्मेंद्र कुमार, उपनिरीक्षक नागेन्द्र तिवारी और उनकी टीम की इस मुस्तैदी ने यकीनन शहर को किसी बड़े खतरे से बचा लिया है। लेकिन जावेद के उन दो कीपैड मोबाइलों में जो नंबर फीड हैं, वो अगर ईमानदारी से खंगाले जाएं, तो अपराधियों के चेहरों से नकाब उठ सकता है।








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